JAIPUR

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JAIPUR  शहर भारत देश के क्षेत्रफल की दर्ष्टि से सबसे बड़े राज्य राजस्थान की राजधानी है। JAIPUR  को पिंक सिटी अथवा गुलाबी नगरी भी कहा जाता  है। महाराज सवाई रामसिंह ने इंग्लैंड की महारानी एलिज़ाबेथ प्रिंस ऑफ वेल्स युवराज अल्बर्ट के स्वागत में पूरे शहर को गुलाबी रंग से सजा दिया था। तभी से शहर का नाम गुलाबी नगरी पड़ा है। राजा जयसिंह द्वितीय के नाम पर ही इस शहर का नाम जयपुर पड़ा। जयपुर की स्थापना आमेर के महाराजा सवाई जयसिंह (द्वितीय) करवाई थी। जुलाई 2019 में यूनेस्को द्वारा जयपुर को वर्ल्ड हेरिटेज सिटी के रूप में  दर्जा दिया गया है जयपुर  शहर तीन ओर से अरावली पर्वतमाला से घिरा हुआ है। जयपुर शहर की पहचान यहाँ के महलों और पुराने घरों में लगे गुलाबी  पत्थरों से होती है देश के सबसे प्रतिभाशाली वास्तुकारों में इस शहर के वास्तुकार विद्याधर भट्टाचार्य का नाम सम्मान गोरवतापूर्ण से लिया जाता है।

पिंक सिटी JAIPUR टूरिस्ट के लिहाज से सबसे अच्छा स्पॉट है। जयपुर शहर के विशाल आकर्षण और सुंदर बसावट को देखने पर इसकी जितनी तारीफ करे उतनी ही कम है तारीफ करते-करते शब्दों की कमी खलने लगेजी पर तारीफ खमत नहीं होगी इस प्रकार का हे अपना जयपुर। JAIPUR की संस्कृति, वास्तुकला, परंपरा, कला, आभूषण और वस्त्र आदि यात्रियों को हमेशा में मन भावन लगता हैं। जयपुर शहर ऐसा शहर है, जिसे आधुनिकीकरण के बाद भी अपनी प्राचीन सभ्यता और गौरवशाली अतीत के लिए भी माना जाता है। आज दुनिया भर से रोज हजारों पर्यटक इस गुलाबी नगरी को देखने आते है ।

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राजस्थान की राजधानी जयपुर सुंदर नगरों, हवेलियों और किलों की भरमार है जयपुर शहर की संस्कर्ति नहीं अद्भुत हे जयपुर में आने के बाद ऐसा महसूस होता है जैसे  कि आप किसी रजवाडे में प्रवेश कर गये हैं, शाही साफ़ा बांधे जयपुर के बना ,और लंहगा-चुन्नी से सजी जयपुर की नारियां, गपशप मारते जयपुर के वृद्ध लोग, राजस्थानी भाषा में कितनी प्यारी और मिटी बोलियां,पधारो म्हारे देश जैसा स्वागत और बैठो सा, जीमो सा, जैसी बातें, कितनी सुहावनी लगती हैयह की बोलिया। 

Jaipur ki history - जयपुर का इतिहास 

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जयपुर शहर की स्थापना 1727 में आमेर के राजा जय सिंह द्वितीय द्वारा की गई थी , जिन्होंने 1699 से 1743 तक शासन किया था। उन्होंने बढ़ती हुई जनसंख्या और बढ़ती कमी को समायोजित करने के लिए अपनी राजधानी आमेर से 11 किलोमीटर दूर जयपुर में स्थानांतरित करने की योजना बनाई। विद्याधर भट्टाचार्य के वास्तु मार्गदर्शन के तहत , जयपुर को वास्तु शास्त्र और शिल्पा शास्त्र के सिद्धांतों के आधार पर योजनाबद्ध किया गया था ।

जयपुर शहर का निर्माण 1726 में शुरू हुआ और प्रमुख सड़कों, कार्यालयों और महलों को पूरा करने में चार साल लगे। शहर को नौ ब्लॉकों में विभाजित किया गया था, जिनमें से दो में राज्य इमारतें और महल शामिल थे, शेष सात जनता को आवंटित किए गए थे। विशाल प्राचीर का निर्माण किया गया था, जिसमें सात किलेबंद द्वार थे। शहर चारों ओर से दीवारों और परकोटों से घिरा हुआ है, जिसमें प्रवेश के लिए सात दरवाजे हैं। बाद में एक और द्वार भी बना जो 'न्यू गेट' कहलाया। पूरा शहर करीब छह भागों में बँटा है और यह 111 फुट चौड़ी सड़कों से विभाजित है।

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यह शहर प्रारंभ से ही 'गुलाबी' नगर नहीं था बल्कि अन्य सामान्य नगरों की ही तरह था, लेकिन 1876 में जब वेल्स के राजकुमार आए तो महाराजा रामसिंह (द्वितीय) के आदेश से पूरे शहर को गुलाबी रंग से जादुई आकर्षण प्रदान करने की कोशिश की गई थी। उसी के बाद से यह शहर 'गुलाबी नगरी' के नाम से प्रसिद्ध हो गया। सुंदर भवनों के आकर्षक स्थापत्य वाले, दो सौ वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्रफल में फैले जयपुर में जलमहल, जंतर-मंतर, आमेर महल, नाहरगढ़ का किला, हवामहल और आमेर का किला राजपूतों के वास्तुशिल्प के बेजोड़ नमूने हैं।

places to visit in Jaipur - जयपुर के दर्शनीय स्थल

हवा महल - 

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hawa mahal jaipur -tourist place near jaipur राजस्थान के जयपुर शहर के मध्य में स्थित खूबसूरत हवा महल पांच मंजिला पर्यटक आकर्षणो में से एक है | हवा महल का निर्माण 1799 में महाराजा सवाई प्रताप ,महाराजा सवाई जय सिंह के पोते कछवाह राजपूत वंश के शासक ने करवाया था | गुलाबी शहर में स्थित हवा महल राजपूतो की शाही विरासत वास्तुकला संस्कृति के अद्भुत मिश्रण का प्रतीक है

भगवान श्रीकृष्ण के मुखुट जैसी इस पांच मंजिला इमारत में 953  झरोखे है हवा महल की खास बात यह हे की दुनिया में बिना किसी नीव के बनी सबसे ऊंची इमारत हे हवा महल का निर्माण सवाई प्रताप सिंग ने सन 1799 में करवाया था पांचो मजिलो में अलग -अलग मन्दिर  बने हुए हे उत्सवो के लिए पहली मंजिल पर शरद मंदिर बना हुआ  है दूसरी मंजिल पर रतन मंदिर बना हुआ हे  जिसे ग्लासवर्क से सजाया जाता हेअन्य तीन मजिलो पर विचित्र मंदिर  प्रकास मंदिर और हवा मंदिर  बने हुआ है इन्ही के कारण ये best tourist place है

हवा महल की अधिक जानकारी के लिए क्लिक करे 

जल महल - 



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jal mahal jaipur -places to visit in jaipur जल महल जयपुर की मानसागर झील के मध्य स्थित है tourist place near jaipur वाले शीर्ष स्थानों में से best tourist place है  यह महल झील के  बीचों बीच होने  के कारण आइ बॉल भी कहा  जाता है जल महल अत्यंत खूबसूरत महल है  जल महल के बगल में विशाल पहाड़ दिखाई देते हे जिन पर ऐतिहासिक मंदिर और किले बने हुए हे झील के दूसरी और गुलाबी शहर जयपुर स्थित हे इस शाही निवास से पहाड़ और झील का सुन्दर नजारा देखा जा सकता है जल महल का सबसे आकर्षक स्वम शरोवर है places to visit in jaipur जल महल best tourist place in jaipurहै  

jal mahal jaipur  जल महल पांच मंजिला महल है जिसमे से चार मंजिल पानी के अंदर है  और पांचवी पानी के ऊपर है इस खूबसूरत महल  छत  बगीच है जिसे चमेली बाग कहते है इस महल में  पर्यटकों को जाने की अनुमति नहीं है इसलिए  जलमहल का दूर से आनंद ले सकते है जलमहल अब पक्षी अभ्यारण के रूप में भी विकसित हो रहा है

जल महल  की अधिक जानकारी के लिए क्लिक करे 

नाहरगढ़ किला  -

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tourist place in jaipur Rajasthan नाहरगढ़  किला कई  अनगिनत महलो और सूंदर ऐतिहासिक किलो इमारतों में  से एक है नाहरगढ़ किला एक अभेद्य  दुर्ग है जो  अपने  पड़ोसी किलो आमेर  और जयगढ़ किलो के साथ  मिलकर जयपुर शहर  के मजबूत रक्षक के रूप  में खड़ा है  नाहरगढ़ किला एक सुन्दर  इंडो -यूरोपियन आर्किटेक्चर  है   नाहरगढ़ का अर्थ  बाघों  का  निवास  होता है  जिसके अंदर कई  खूबसूरत रचनाओं का संग्रह  और जैविक  उद्यान  भी  स्थित है  जब आप इस किले के ताड़गीट  नामक प्रवेश द्वार से किले में प्रवेश  करेंगे तो कई  मंदिर एवं भवन मिलेंगे  जिसमे से एक भवन माधवेन्द्रः भवन हे जिसका इस्तेमाल राजा महाराजा अपने परिवारजनों  के साथ गर्मियों के दिनों में  ठंडी हवा  खाने एवं उनके साथ समय बिताने में करते थे

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