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Ajmer sharif dargah-timing,miracle,history,guidance,facts, urs festival-अजमेर शरीफ दरगाह -ख्वाजा मोइनुदीन चिशती की दरगाह 

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tourist places in ajmer-अजमेर शरीफ दरगाह,यह राजस्थान के अजमेर में लोकप्रिय और महत्वपूर्ण मुस्लिम तीर्थ स्थल है यह दरगाह ख्वाजा मोहिनुद्दीन चिश्ती की है वह  सूफी संत थे उन्होंने अपना जीवन ग़रीबो व दलितों की सेवा में समर्पित किया था

ajmer  sharif dhargh ki history - इतिहास 

tourist places in ajmer मोहिनुद्दीन चिश्ती ख्वाजा ग़रीब नवाज की दरगह का निर्माण तारागढ़ की तलहटी में  1143में शुरू किया गया और 1233 में पूरा किया गया  था मांडू के सुल्तान गयासुदीन खिलजी ने इसे सन  1464 में पक्का करवाया था मुग़ल शासन के दौरान इसका और विस्तार हुआ। यहाँ अकबर ने 1570 ई 'अकबरी मस्जिद' बुलंद दरवाजा 'एवं महफिलखाना बनवाया। दरगह के पूर्वी दरवाजे पर शाहजहाँ बेग़म द्वारा बनवाया हुआ।बेगमी दालान है   ऐसा मन जाता है की ख्वाजा ने अपनी अपनी मौत से 6  दिन पहले खुद को एक कमरे में बंद कर  लिया था उन्होंने अपने नश्वर शरीर को एकांत में छोड़ दिया था तब से यह दरगह एक लोकप्रिय धार्मिक स्थल बन गया। 

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places to visit in ajmer  अजमेर सरीफ दरगह ' ख्वाजा मोहिनुद्दीन चिश्ती की यह मस्जिद इस्लाम धर्म के पवित्र स्थलों मेसे एक है इस मस्जिद में लाखो लोग आते है यह अलग अलग चरणों में बनाई गयी है इसमें एक सिल्वर गोईंग में संत की मूल कब्र है यहाँ शुद्ध  मन से की गयी हर मनोकामना कबूल होती है।इस दरगाह में प्रवेश के लिए चारो तरफ से बेहद भव्ये एवं आकर्सण  दरवाजे बनाए गए है  places to visit in ajmer sharif dargah में कई सारे स्मारक है -

 1 . निजाम गेट 

2 . बुलन्द दरवाजा 

3  . डिंग्स 

4 . चिराग 

5 . शाम खाना या महफ़िलखाना 

6 . बेगमी दालान 

निजाम गेट -: यह 1911 मे हैदराबाद डेक्कन के मीर उस्मान अली खान द्वारा बनाया गया था यह अजमेर शरीफ की दरगाह मे बने चारो तरफ के प्रमुख दरवाजो में से सबसे खुबसुरत और आकर्षक दरवाजा है 

बुलन्द दरवाजा -: यह एक विशाल द्वार है उर्स महोत्सव की शुरुआत से पहले इस द्वार के ऊपर ध्वज फहराया जाता है 
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डिंग्स -;  पुराने समय मे खाना पकाने के लिए उपयोग में लाया जाने वाला एक विशाल बर्तन है जो की सहम के सामने स्थित दूसरे बुलंद दरवाजे के किनारे पर स्थित है 

चिराग -:  यह एक बहोत बड़ी कड़ाही हे इसमें 20 पोंड चावल पकाए जा सकते है 

शाम खाना या महफिलखाना -;   यहाँ पर दिल छू लेने वाली कव्वाली का अदभुत आनन्द ले सकते है ये चिराग के पश्चिमी तरफ स्थित हे वह स्थान जहाँ कव्वाली का आयोजन किया जाता हे नवाब-बशीर-उद-डोवा सर 'अस्मान जहां 'के द्वारा बनवाया गया था 

बेगमी दालान -: मुख्य मंदिर के  पूर्व हिस्से में स्थित एक छोटी और सुंदिर दालान है  जिसे बेगमी दालान कहते हे यह दालान सम्राट शाहजहाँ की बेटी राजकुमारी जहान आरा बेगम द्वारा बनाए गई थी। 

places to visit in ajmer sharif dargah में स्थित कुछ और मुख्य स्थान -;
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सांडली मस्जिद 

बीबी हाफिज जमाल के मजार 

ऑलिया मस्जिद 

बाबा फरीद का चिली 

जन्नली दरवाजा 

अकबरी मस्जिद 

Tourist places in ajmer - ajmer sharif dargah में दिन में किये जाने वाले कार्य -

खिदमत -: खिदमत में मजार की सफाई की जाती है खिदमत दिन में दो बार की जाती है एक सबह 4 बजे अजान के समय पर और दूसरी 3 बजे शाम को की जाती है। सुबह की खिदमत फजर प्रार्थना के  आधे घंटे पहले होती है 
शाम की खिदमत केवल पुरुषो द्वारा की जाती है महिलाओ को खिदमत की अनुमति नहीं है फूलो और चन्दनो के साथ खिदमत पढ़ी जाती है 

ईशा प्रार्थना - :   यह प्रार्थना  दरवाजा बंद होने के बिस मिनट पहले होती है पांचवे पहर में जब घंटा पांच बार बजता हे तब तीन खादिम मकबरे को साफ करते हे और जैसे ही छटवी बार घंटा बजता है तब कव्वाल विशेष करफा गीत जाते है और  दरवाजा बंद हो है। 

अजमेर शरीफ दरगाह के नियम -

ख्वाजा की मजार पर कोई भी व्यक्ति सिर खोलकर नहीं जा सकता है सभी को अपना सर ढकना अनिवार्य है 

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मजार के दर्शन के के लिए किसी भी तरह का बेग या सामान ले जाने की सख्त मनाही है  कैमरा ले जाने की भी अनुमति नहीं है 
ख्वाजा के दर पर बिना हाथ-पैर साफ किए प्रवेश की  अनुमति नहीं है 

खवाजा मोहिनुद्दीन चिश्ती की पुण्य तिथि पर मनाए जाने वाले उर्स के दौरान अल्लाह के मुरीदो द्वारा गरम जलते कड़ाई के अंदर खड़े होकर भक्तो को खाना बाटा जाता है। 

Ajmer sharif dargah ki timing entry fee  - समय ,प्रवेश शुल्क 

दरगाह सुबह 6 :30  बजे खुलती है और रात 9 :30 बंद हो जाती है 

यह दिन में 3 :30 से 4:00 बजे तक बंद रहता है 

इस दरगाह में प्रवेश करने के लिए कोई प्रवेश शुल्क की आवश्यकता नहीं हे क्योकि यह पवित्र स्थल हे  

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